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पर्यावरण, पारिस्थिक, एवं कृषि

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पुस्तक सारांश :- बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों में पर्यावरण के प्रति एक वैश्विक जनजागृति देखने को मिली। पर्यावरण के क्षरण को एक वास्तविक समस्या के रूप में स्वीकार किया जाने लगा। वैश्विक ऊष्मन और उसके लिए कार्बन उत्सर्जन के दायित्व तथा ओजोन क्षय तथा उसके लिए क्लोरोफ्लोरो कार्बनों के दायित्व को विश्वभर ने स्वीकार किया, परंतु कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और ब्थ्ब्े के विकल्पों की खोज और उसे समस्त विश्व को उपलब्ध कराने जैसे पर्यावरणीय दायित्वों के प्रति विश्व दो भागों में बंटा प्रतीत होने लगा। उधर संसार के विकासशील देश भी संगठित होकर पर्यावरण के प्रति संघर्ष में जागरूक दिखाई पड़ने लगे। अब सम्पोषणीय विकास, जैवविविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के प्रति विश्व तटस्थ नहीं दिखाई पड़ता। अब “पृथ्वी बचाओ” का विचार हरेक मानव को उद्वेलित करता है। पर्यावरण संरक्षण के इन्हीं विविध आयामों को समेटती यह पुस्तक पर्यावरण के विविध आयामों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करती है। पारिस्थितिक तंत्र का गठन और उसके संतुलन की अवधारणा को सूक्ष्मता के साथ विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में विस्तृत रूप से जैव विविधता पर चर्चा की गई है और विभिन्न संकटग्रस्त वनस्पति एवं प्राणि प्रजातियों की पहचान और इनके संरक्षण हेतु व्यापक चर्चा की गई है। यह पुस्तक में प्रदूषण के विभिन्न प्रकार, उसके कारण और उसके समाधान की नीति तय करने हेतु आवश्यक विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास पूरे लगन एवं निष्ठा से किया गया है। इस पुस्तक में विभिन्न संरक्षणात्मक उपायों, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों, सम्मेलनों, समझौतों एवं विधियों का सूक्ष्म विश्लेषण भी शामिल है जो नीति निर्माताओं को भी एक दिशा देने का कार्य करेगा। यह पुस्तक पर्यावरण अध्ययन के लगभग सभी आयामों को समेटती है। सरल भाषा में आम पाठक को समस्या से रुबरु कराती है और इसके समाधान हेतु प्रत्येक व्यक्ति का उतरदायित्व भी तय करने का प्रयास करती हैं। यह पुस्तक विश्वविद्यालयी शिक्षा एवं सिविल सेवा परीक्षा में पर्यावरण अध्ययन के महत्वपूर्ण विषय के रुप में उभरा है। उनकी जरूरतों को पूरा करना भी इस पुस्तक के किंचित उद्देश्यों में शामिल है।
Contents of the Book
  • प्राकृतिक पर्यावरण
  • जीव मंडल
  • पारिस्थितिक तंत्र
  • पारिस्थितिक तंत्र के प्रकार
  • पर्यावरण के निय
  • मानव पर्यावरण
  • रूपांतरण     
  • मिट्टियाँ
  • विश्व बायोम
  • स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र
  • मानव प्रभाव 
  • प्रदूषण
  • जैव विविधता
  • वन्य जीवन
  • वन संसाधन
  • प्राकृतिक संरक्षण
  • पारिस्थितिक तंत्र प्रबंधन
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआइए)
  • चिरस्थायी विकास
  • विधान 
  • आधुनिक सिद्धान्त 

      परिशिष्ट-1 शब्दावली

      परिशिष्ट-2

      परिशिष्ट-3

      परिशिष्ट-4

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